सोलापुर के राजा विक्रम बहुत ही न्यायप्रिय और बुद्धिमान थे। एक दिन उनके दरबार में खबर आई कि शाही अन्न भंडार से अनाज की चोरी हो रही है। राजा ने तुरंत अपने तीन सबसे भरोसेमंद जासूसों को बुलाया।
उन्होंने निर्देश दिया, 'जाओ और अलग-अलग तरीके से पता लगाओ। एक-दूसरे को पता नहीं चलना चाहिए। जब तुम्हारी बातें एक जैसी हों, तभी हम कदम उठाएंगे।'
पहले जासूस, अर्जुन ने एक मजदूर का भेष बनाया और भंडार के अंदर से सब देखा। दूसरी जासूस, मीरा ने एक व्यापारी का रूप धरा और आसपास की हलचल पर नज़र रखी। तीसरे जासूस, रवि ने पास के जंगल में छिपकर रात के समय होने वाली गतिविधियों को देखा।
कुछ दिनों बाद, तीनों राजा के सामने आए। अर्जुन ने कहा, 'मैंने एक आदमी को अनाज की बोरियाँ छिपाते देखा।' मीरा ने कहा, 'मैंने देखा कि एक व्यक्ति रात में भारी सामान ले जा रहा है।' रवि ने कहा, 'मैंने उस व्यक्ति को जंगल के पुराने रास्ते से जाते देखा।'
तीनों की बातें एक ही व्यक्ति और एक ही घटना की ओर इशारा कर रही थीं। चूँकि तीनों की जानकारी आपस में मेल खा रही थी, राजा विक्रम को पूरा यकीन हो गया। उन्होंने तुरंत सैनिकों को भेजा और चोर को पकड़ लिया। यदि राजा केवल एक की बात पर विश्वास करते, तो शायद गलती हो सकती थी, लेकिन तीन गवाहों की बात एक होने पर सच सामने आ गया।