एक शांत गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। एक दोपहर, जब वह अपने दादाजी के साथ तालाब के किनारे बैठा था, उसने पानी पर खिले सुंदर कमल के फूलों को देखा।
उसने अपने दादाजी से पूछा, 'दादाजी, कुछ कमल के फूल पानी से बहुत ऊपर हैं और कुछ बहुत नीचे, ऐसा क्यों?'
दादाजी मुस्कुराए और बोले, 'अर्जुन, ध्यान से देखो। कमल के डंठल की लंबाई पानी की गहराई पर निर्भर करती है। जहाँ पानी गहरा होता है, वहाँ डंठल लंबा होता है ताकि फूल सतह तक पहुँच सके। जहाँ पानी कम गहरा होता है, वहाँ डंठल छोटा रहता है।'
अर्जुन ने सोचा और पूछा, 'क्या यह बात इंसानों पर भी लागू होती है?'
दादाजी ने प्यार से समझाया, 'हाँ बेटा। इंसान की महानता इस बात से नहीं मापी जाती कि उसके पास क्या है, बल्कि इस बात से मापी जाती है कि उसके विचार कितने गहरे हैं। जैसे पानी की गहराई के अनुसार कमल बढ़ता है, वैसे ही मनुष्य का उत्थान उसके मन की गहराई, धैर्य और ज्ञान पर निर्भर करता है। यदि तुम्हारा मन विशाल और गहरा है, तो तुम जीवन में बहुत ऊँचे मुकाम हासिल करोगे।'
अर्जुन समझ गया कि उसे केवल बड़ा आदमी नहीं, बल्कि एक महान विचारों वाला व्यक्ति बनना है।