एक सुंदर गाँव में आर्यन नाम का एक युवक रहता था। वह बहुत अमीर था, लेकिन उसमें एक कमी थी—वह बहुत कंजूस था। उसके पास चाहे कितना भी धन हो, वह हमेशा सोचता था, 'मैंने यह मेहनत से कमाया है, मैं इसे दूसरों को क्यों दूँ?'
उसी गाँव में रवि नाम का एक किसान रहता था। उसके पास बहुत कम साधन थे, लेकिन उसका दिल बहुत बड़ा था। एक बार, भयंकर सूखे के दौरान, रवि ने अपनी छोटी सी बचत में से कुछ हिस्सा अपने पड़ोसी सोमू के परिवार को भोजन के लिए दे दिया। रवि के पास खुद के लिए कम बचा था, लेकिन मदद करने के बाद उसके चेहरे पर एक अनोखी चमक थी।
एक दिन आर्यन ने रवि से पूछा, 'रवि, तुम्हारे पास तो बहुत कम है, फिर भी तुम दूसरों को क्यों दे रहे हो? क्या तुम्हें डर नहीं लगता?'
रवि मुस्कुराया और बोला, 'आर्यन, देने में जो खुशी है, वह कुछ और ही है। जब हम दूसरों की मदद करते हैं, तो हमारा मन बड़ा हो जाता है। जिनके पास बड़ा दिल नहीं होता, वे चाहे दुनिया भर का धन इकट्ठा कर लें, लेकिन उन्हें यह कहने का गर्व और खुशी कभी नहीं मिल सकती कि "हमने दान किया है"।'
आर्यन को बात समझ आ गई। उसने महसूस किया कि सिर्फ पैसा जमा करने में कोई फायदा नहीं है। धीरे-धीरे आर्यन ने भी दूसरों की मदद करना शुरू किया, और पहली बार उसे वह सुकून मिला जो पैसों से नहीं खरीदा जा सकता था।