एक खुशहाल गाँव में लियो नाम का एक युवक रहता था। उसके पिता उस इलाके के सबसे बड़े व्यापारी थे। लियो के पास सब कुछ था—कीमती कपड़े, स्वादिष्ट भोजन और एक बड़ा महल जैसा घर। लेकिन लियो में एक बहुत बड़ी कमी थी—वह बहुत आलसी था। वह सारा दिन या तो सोता रहता था या बस खाली बैठा रहता था।
एक दिन, एक ज्ञानी महात्मा उस गाँव में आए। लियो को देखकर उन्होंने व्यापारी से कहा, 'आप बहुत भाग्यशाली हैं, लेकिन आपके पुत्र के पास एक बड़ी समस्या है।' व्यापारी घबरा गया और पूछा, 'कैसी समस्या?' महात्मा ने कहा, 'उसके पास चाहे जितना भी धन हो, वह उसे कभी सही तरह से इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। आलस के कारण वह धन उसके किसी काम का नहीं रहेगा।'
व्यापारी ने लियो को बुलाया और उसके सामने सोने के सिक्कों से भरी एक थैली रखी। 'लियो, इस धन का तुम क्या करोगे?' पिता ने पूछा। लियो ने उबासी ली और कहा, 'मुझे बहुत नींद आ रही है, मैं सोने जा रहा हूँ।'
व्यापारी दुखी होकर महात्मा के पास गया। महात्मा ने समझाया, 'जिस व्यक्ति में कर्म करने की इच्छा नहीं है, उसके पास यदि पूरी दुनिया का राज भी हो, तो भी वह कभी सुखी नहीं हो सकता। उसके लिए सोना भी पत्थर के समान है।'
लियो को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने धीरे-धीरे काम करना शुरू किया। जब उसने मेहनत करना सीखा, तभी उसे समझ आया कि धन का असली मूल्य उसे सही दिशा में उपयोग करने में है।