एक शांत गाँव में अर्जुन और मीरा नाम के दो भाई-बहन रहते थे। उनके पिता एक मेहनती किसान थे। एक दिन पिता ने उन्हें एक काम सौंपा, 'मैंने तुम दोनों के लिए जमीन का एक छोटा टुकड़ा रखा है। वहाँ सब्जियाँ उगाओ और उन्हें बेचकर अपना खर्च खुद उठाओ।'
मीरा ने बहुत उत्साह के साथ काम शुरू किया। वह रोज़ सुबह जल्दी उठकर मिट्टी तैयार करती, बीज बोती और पौधों को पानी देती। लेकिन अर्जुन हमेशा यही कहता, 'कल करूँगा,' और सो जाता रहता। कुछ ही दिनों में मीरा के पौधे बड़े और हरे-भरे हो गए, लेकिन अर्जुन के खेत में केवल खरपतवार और कांटे उग आए।
जब फसल काटने का समय आया, तो मीरा अपनी ताज़ा सब्जियाँ लेकर बाज़ार गई। गाँव के लोग उसकी मेहनत की बहुत प्रशंसा कर रहे थे। वहीं अर्जुन खाली हाथ बैठा था। तभी गाँव के एक बुजुर्ग ने अर्जुन को देखा और कहा, 'बेटा, जो आलस के कारण काम नहीं करते, लोग उनका मज़ाक उड़ाते हैं। बिना मेहनत के सम्मान नहीं मिलता।' अर्जुन को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने मीरा से मदद मांगी और मेहनत करना शुरू किया। धीरे-धीरे उसका खेत भी हरा-भरा हो गया और उसे भी सम्मान मिला।