बहुत समय पहले, चंद्रपुर नामक एक समृद्ध राज्य में राजकुमार विक्रम रहता था। वह बहुत दयालु था, लेकिन उसकी एक बहुत बुरी आदत थी—आलस्य। वह अपना सारा दिन महल के बगीचे में आराम करने में बिता देता था। उसके पिता, राजा आदित्य, यह देखकर बहुत चिंतित रहते थे। एक दिन राजा ने उसे पास बुलाया और कहा, "पुत्र, यह दुनिया बहुत बड़ी है। यदि तुम अपने आलस्य को त्याग कर परिश्रम करना सीख जाओ, तो तुम इस पूरी दुनिया पर विजय प्राप्त कर सकते हो।"
राजा ने विक्रम की परीक्षा लेने के लिए उसे एक काम दिया। उन्होंने राज्य के किनारे एक बंजर ज़मीन की ओर इशारा किया और कहा, "इस सूखी ज़मीन को एक उपजाऊ खेत में बदल दो।"
विक्रम पहले तो घबराया, लेकिन उसने हार नहीं मानी। वह सुबह सूरज निकलने से पहले ही उठ जाता और खेत में काम करने लगता। कड़ी धूप और थकान के बावजूद वह मेहनत करता रहा। धीरे-धीरे, उस बंजर ज़मीन पर हरियाली छा गई और फसलें लहलहाने लगीं।
गाँव वालों ने जब राजकुमार की मेहनत देखी, तो सबने उसकी प्रशंसा की। विक्रम को समझ आ गया कि आलस्य से कहीं अधिक सुख परिश्रम में है। अपनी मेहनत और लगन से वह एक महान राजा बना और उसने पूरे संसार में सम्मान पाया।