एक छोटे से गाँव में आर्यन नाम का एक लड़का रहता था। वह पढ़ाई में बहुत तेज़ था और हर काम को नियमों के अनुसार करने का शौकीन था। एक दिन, उसने अपनी माँ के लिए लकड़ी का एक छोटा स्टूल बनाने का फैसला किया। उसके पास एक सटीक नक्शा और सही औज़ार थे। वह बहुत आत्मविश्वास के साथ काम में जुट गया।
आर्यन अपने नक्शे और माप में इतना खो गया कि उसने आसपास के वातावरण पर ध्यान ही नहीं दिया। पास ही एक पेड़ के नीचे दादाजी बैठे थे। उन्होंने देखा कि आसमान में काले बादल छा रहे हैं और हवा तेज़ होने लगी है, लेकिन आर्यन को इसकी कोई खबर नहीं थी।
अचानक, तेज़ हवा का एक झोंका आया और आर्यन के सारे औज़ार और लकड़ी के टुकड़े कीचड़ में बिखर गए। आर्यन दुखी होकर रोने लगा, 'मैंने तो सब कुछ सही किया था! मेरा नक्शा भी एकदम सही था, फिर ऐसा क्यों हुआ?'
दादाजी उसके पास आए और प्यार से बोले, 'बेटा, तुम्हारा तरीका सही था, लेकिन तुमने दुनिया के मिजाज को नहीं समझा। सिर्फ किताबी ज्ञान से काम नहीं चलता; सफलता के लिए आपको अपने आस-पास की परिस्थितियों को भी समझना चाहिए।'
आर्यन को अपनी गलती समझ आ गई। अगली बार जब उसने काम शुरू किया, तो उसने पहले मौसम और जगह को अच्छी तरह देख लिया। उसने बहुत ही सुंदर स्टूल बनाया और इस बार उसे कोई परेशानी नहीं हुई।