एक सुंदर से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत बुद्धिमान था, लेकिन उसकी एक बुरी आदत थी—वह बिना सोचे-समझे बोलता था, जिससे दूसरों को दुख पहुँचता था। एक दिन उसकी सहेली मीरा ने उसे अपनी बनाई एक सुंदर पेंटिंग दिखाई। अर्जुन ने उसे सरासने के बजाय कह दिया, 'यह तो बहुत बेकार है!' मीरा की आँखों में आँसू आ गए और उसने अर्जुन से बात करना बंद कर दिया।
अर्जुन के दादाजी ने यह सब देखा। उन्होंने अर्जुन को पास बुलाया और समझाया, 'बेटा, शब्द एक तीर की तरह होते हैं। अगर वे कड़वे हों, तो दिल को गहरा घाव देते हैं। लेकिन अगर वे मीठे हों, तो वे मरहम का काम करते हैं। दूसरों को खुश करने से कहीं ज्यादा कीमती है उन्हें दुख न पहुँचाना।'
अर्जुन को अपनी गलती का अहसास हुआ। अगले दिन वह मीरा के पास गया और बोला, 'मीरा, मुझे माफ़ कर दो। तुम्हारी पेंटिंग सच में बहुत सुंदर थी, मैंने गलत कहा था।' मीरा मुस्कुरा दी और उसने अर्जुन को माफ़ कर दिया। उस दिन के बाद से अर्जुन ने हमेशा मीठा और प्यारा बोलना सीखा।