एक सुंदर से गाँव में कवि नाम की एक लड़की रहती थी। उसे बातें करना बहुत पसंद था, लेकिन उसके बात करने का तरीका लोगों को अच्छा नहीं लगता था। वह अक्सर बिना सोचे-समझे बोलती थी और उसकी बातें उलझी हुई होती थीं।
एक बार गाँव में एक कहानी सुनाने की प्रतियोगिता हुई। जीतने वाले को एक सुंदर पुरस्कार मिलना था। कवि ने भी इसमें भाग लिया। जब उसकी बारी आई, तो उसने जंगल के बारे में बताना शुरू किया। लेकिन वह एक बात से दूसरी बात पर बिना मतलब कूदती रही और उसके शब्द भी बहुत कड़वे थे। लोग उसे सुनकर ऊब गए और उसे कोई पुरस्कार नहीं मिला।
फिर अर्जुन नाम का एक लड़का मंच पर आया। उसने एक नन्हे से बीज की कहानी सुनाई। अर्जुन ने बहुत ही सुंदर ढंग से बात शुरू की। उसने बताया कि कैसे बीज मिट्टी में सोता है, कैसे बारिश की बूंदें उसे जगाती हैं और कैसे वह धीरे-धीरे एक विशाल पेड़ बन जाता है। उसने हर बात को एक सही क्रम में और बहुत ही मीठे शब्दों में कहा। पूरा गाँव मंत्रमुग्ध होकर उसे सुनने लगा। अर्जुन को पहला पुरस्कार मिला।
कवि को बहुत बुरा लगा। उसके दादाजी ने उसे पास बुलाकर समझाया, "बेटी, तुम क्या कह रही हो यह ज़रूरी है, लेकिन तुम कैसे कह रही हो यह उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है। अगर तुम अपनी बात को सही क्रम में और मिठास के साथ कहना सीख जाओगी, तो यह पूरी दुनिया तुम्हारी बातें सुनने के लिए तरसेगी।"
कवि ने दादाजी की बात गाँठ बाँध ली। उसने ध्यान से सुनना और स्पष्टता व मधुरता से बोलना सीखा। धीरे-धीरे, लोग उसकी बातें सुनने के लिए उसके पास आने लगे।