एक सुंदर से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। अर्जुन बहुत ही नेक दिल था, लेकिन उसकी एक आदत थी—वह बहुत ज़्यादा बोलता था। छोटी सी बात को भी वह इतना लंबा खींच देता था कि सुनने वाले ऊब जाते थे। धीरे-धीरे उसके दोस्त उसकी बातें सुनना कम कर देते थे।
एक बार गाँव में मेला लगा था। तभी वहाँ एक छोटी सी घटना हुई। अर्जुन ने सोचा कि वह सबको यह बताएगा। वह बोलना शुरू हुआ और बोलता ही गया। वह वहाँ के मौसम, लोगों के कपड़ों और ज़मीन की धूल के बारे में बताने लगा। दस मिनट बीत गए, लेकिन उसने असली बात नहीं बताई। लोग परेशान होकर वहाँ से जाने लगे।
गाँव के एक बुद्धिमान बुजुर्ग, राघव जी, ने अर्जुन को पास बुलाया और प्यार से समझाया, 'बेटा, अगर तुम किसी को उपहार देना चाहते हो और उसे बहुत सारे कागजों में लपेट दोगे, तो उसे ढूँढना मुश्किल होगा। लेकिन अगर तुम उसे एक सुंदर से रिबन से बाँधोगे, तो वह तुरंत मिल जाएगा। शब्द भी ऐसे ही होते हैं। बहुत ज़्यादा बोलने से बात का महत्व खो जाता है।'
अर्जुन को अपनी गलती समझ आ गई। उसने महसूस किया कि बहुत कुछ कहने की कोशिश में वह कुछ भी सही से नहीं कह पा रहा था। उस दिन के बाद, अर्जुन ने कम और सटीक बोलना सीखा। अब गाँव के लोग उसकी बातों को बड़े ध्यान से सुनते हैं।