एक शांत गाँव में आर्यन नाम का एक लड़का अपने दादाजी के साथ रहता था। उसके दादाजी मिट्टी के बर्तन बनाने में बहुत माहिर थे। एक दिन, आर्यन ने देखा कि दादाजी एक बहुत ही सुंदर और बड़ा मिट्टी का घड़ा बना रहे हैं। वह घड़ा इतना सुंदर था कि आर्यन की आँखें फटी की फटी रह गईं। खुशी के मारे आर्यन दौड़कर गाँव के बीचों-बीच गया और चिल्लाकर कहने लगा, "मेरे दादाजी दुनिया का सबसे सुंदर घड़ा बना रहे हैं! वह बहुत बड़ा और शानदार होगा!"
जल्द ही पूरे गाँव में उस घड़े की चर्चा होने लगी। लेकिन कुछ दिनों बाद, जब घड़ा अभी सूख ही रहा था, अचानक एक छोटी सी चीज़ उस पर गिर गई और उसमें एक बारीक दरार आ गई। आर्यन यह देखकर बहुत दुखी हो गया। जब वह गाँव से गुजरता, तो लोग आपस में कानाफूसी करते, "क्या वह महान घड़ा टूट गया?" कुछ लोग तो हँसने भी लगे। आर्यन को बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई।
दादाजी ने आर्यन को पास बुलाया और प्यार से समझाया, "बेटा, असली वीरता काम को चुपचाप पूरा करने में है। यदि हम किसी काम के बारे में पहले ही बता देते हैं, तो काम में आने वाली छोटी सी बाधा भी हमें बहुत गहरा दुख देती है। काम पूरा होने के बाद उसकी सफलता का आनंद लेना ही बेहतर है।"
आर्यन को अपनी गलती समझ आ गई। उसने सीखा कि किसी भी काम को पूरी तरह सफल होने से पहले उसका ढिंढोरा नहीं पीटना चाहिए।