एक शांत गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का अपने दादाजी के साथ रहता था। उसके दादाजी का एक बहुत बड़ा बगीचा था। एक दिन दादाजी ने अर्जुन को एक छोटा सा काला बीज दिया और कहा, 'अर्जुन, इसे बगीचे में बो दो। इसे उगाना मुश्किल होगा, लेकिन अगर तुम हिम्मत मत हारना, तो यह तुम्हें बहुत खुशी देगा।'
अर्जुन ने बीज बो दिया। लेकिन जैसे-जैसे दिन बीते, काम कठिन होता गया। कड़ी धूप में पानी देना, खरपतवार निकालना और कीड़ों से बचाना बहुत थका देने वाला था। एक दिन अर्जुन थककर रोने लगा, 'दादाजी, यह बहुत मुश्किल है! मेरे हाथों में दर्द हो रहा है और मुझे बहुत बुरा लग रहा है।'
दादाजी ने उसके पास बैठकर प्यार से कहा, 'अर्जुन, अभी जो तुम कष्ट सह रहे हो, वह बस कुछ समय के लिए है। अगर तुम अभी हार मान लोगे, तो तुम उस मिठास को कभी नहीं चख पाओगे। बस डटे रहो।'
दादाजी की बात मानकर अर्जुन ने हार नहीं मानी। महीनों बीत गए। एक सुबह जब अर्जुन बगीचे में गया, तो वह दंग रह गया! जहाँ छोटा सा बीज था, वहाँ एक विशाल आम का पेड़ खड़ा था, जो रसीले आमों से लदा हुआ था। जैसे ही अर्जुन ने वह मीठा आम खाया, उसकी सारी थकान और दुख गायब हो गए और उसे अपार खुशी मिली।