एक शांत गाँव में आर्यन नाम का एक लड़का रहता था। आर्यन बहुत होनहार था, लेकिन उसकी एक बुरी आदत थी—वह किसी भी काम को शुरू तो करता था, पर उसे पूरा किए बिना ही छोड़ देता था।
एक दिन, आर्यन ने अपने बगीचे में एक छोटा सा पौधा लगाया। उसने उसे पानी देना शुरू किया, लेकिन दो दिन बाद उसने सोचा, 'कल देखूँगा,' और काम छोड़ दिया। कुछ ही दिनों में, पानी न मिलने के कारण वह नन्हा पौधा मुरझाने लगा।
उसी समय, आर्यन का अपने दोस्त लियो के साथ एक छोटा सा झगड़ा हुआ था। आर्यन ने उस झगड़े को सुलझाने के बजाय अपने मन में कड़वाहट पाल ली। वह छोटा सा गुस्सा उसके मन में धीरे-धीरे बढ़ने लगा और उसे बेचैन करने लगा।
कुछ हफ़्तों बाद, वह पौधा पूरी तरह सूख गया और लियो के साथ उसकी दोस्ती भी टूट गई। आर्यन बहुत दुखी था। तब उसके दादाजी ने उसे समझाया, 'आर्यन, आधा छोड़ा हुआ काम और मन में दबा हुआ गुस्सा, दोनों ही बुझती हुई आग की चिंगारी की तरह हैं। वे भले ही छोटे दिखें, लेकिन धीरे-धीरे बढ़कर सब कुछ नष्ट कर सकते हैं।'
आर्यन को अपनी गलती समझ आ गई। उसने तय किया कि वह अब से हर काम को पूरा करेगा और अपने मन में किसी के लिए नफरत नहीं रखेगा।