बहुत समय पहले की बात है, एक सुंदर राज्य में आर्यन नाम का एक युवक रहता था। आर्यन बहुत बुद्धिमान था, लेकिन गुस्से में वह थोड़ा कड़वा बोल जाता था। एक बार, पड़ोसी राज्य के राजा विक्रम ने आर्यन के राज्य की एक छोटी सी ज़मीन पर कब्ज़ा करने का फैसला किया। इससे दोनों राज्यों के बीच युद्ध छिड़ने का खतरा पैदा हो गया।
आर्यन के राजा ने उसे दूत बनाकर भेजा। राजा ने कहा, 'आर्यन, तुम राजा विक्रम के पास जाओ और उन्हें सच बताओ, लेकिन झगड़ा करने मत जाना।'
जब आर्यन महल पहुँचा, तो उसने देखा कि राजा विक्रम बहुत सख्त स्वभाव के थे। पहले तो आर्यन गुस्से में चिल्लाया, 'आप हमारी ज़मीन क्यों लेना चाहते हैं? यह गलत है!' राजा विक्रम क्रोधित हो गए और बोले, 'अगर तुम यहाँ केवल बहस करने आए हो, तो अभी चले जाओ।'
आर्यन को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने गहरी साँस ली और खुद को शांत किया। इस बार उसने लंबी और कड़वी बातें करने के बजाय, बहुत ही संक्षेप में और प्यार से बात करने का फैसला किया। उसने मुस्कुराते हुए कहा, 'महाराज, आपकी शक्ति का लोहा पूरी दुनिया मानती है। लेकिन यह छोटी सी ज़मीन हमारे लोगों की आजीविका है। यदि आप हमारे विजेता के बजाय हमारे मित्र बन जाएँ, तो हमारे दोनों राज्य हमेशा शांति से रह सकते हैं।'
आर्यन की मधुर वाणी ने राजा के क्रोध को शांत कर दिया। राजा मुस्कुराए और उन्होंने युद्ध के बजाय शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए। आर्यन ने सफलतापूर्वक अपना काम पूरा किया।