एक सुंदर से गाँव में लियो नाम का एक लड़का रहता था। उसके पिता एक मेहनती किसान थे। एक दिन, गाँव में आए एक अमीर व्यापारी ने लियो को कुछ सोने के सिक्के दिए। व्यापारी ने कहा, 'बेटा, इन्हें रख लो। इसके लिए तुम्हें कोई मेहनत करने की ज़रूरत नहीं है।'
लियो बहुत खुश हुआ। उसे लगा कि वह दुनिया का सबसे अमीर लड़का है। लेकिन कुछ ही दिनों में, वह सोना खत्म होने लगा। लियो ने उन सिक्कों से बहुत सी चीज़ें खरीदीं, लेकिन जल्द ही उसके पास कुछ नहीं बचा। वहीं दूसरी ओर, उसका दोस्त सैम रोज़ अपने बगीचे में मेहनत करता था। सैम के पास बहुत सोना नहीं था, लेकिन उसके पास हमेशा ताज़ी सब्ज़ियाँ और मेहनत की खुशी थी।
लियो परेशान होकर अपने पिता के पास गया और बोला, 'पिताजी, वह सोना कहाँ चला गया? बिना मेहनत के मिला धन इतना जल्दी क्यों खत्म हो गया?'
उसके पिता ने प्यार से समझाया, 'बेटा, बिना परिश्रम के प्राप्त हुआ धन रेत के महल जैसा होता है। वह टिकता नहीं है। एक सच्चा राज्य या एक सच्चा इंसान वही है जिसकी संपत्ति उसकी मेहनत और बुद्धि से बनी हो। मेहनत से कमाया गया धन ही असली ताकत देता है।'
लियो समझ गया। उसने भी अपने पिता के साथ काम करना शुरू कर दिया और महसूस किया कि मेहनत से कमाई गई चीज़ों में ही असली सुकून है।