पुराने समय में, सोलापुर नामक एक सुंदर राज्य में कधिर नाम का एक राजकुमार रहता था। वह अपने राज्य को दुनिया का सबसे अमीर राज्य बनाना चाहता था। उसके मंत्री ने सलाह दी, 'यदि हम लोगों से भारी कर (tax) वसूलें, तो हमारा खजाना सोने से भर जाएगा!'
कधिर ने मंत्री की बात मान ली। सूखे के समय में भी, जब किसानों की फसलें बर्बाद हो रही थीं, उसने उनसे कर वसूलना जारी रखा। महल तो रत्नों से चमकने लगा, लेकिन गलियों में लोग भूख से तड़पने लगे। एक दिन माधव नाम के एक वृद्ध किसान ने राजकुमार से कहा, 'राजकुमार, आपका खजाना तो भर गया है, लेकिन हमारे पेट खाली हैं। बिना दया और प्रेम के कमाया गया धन उस सूखे पत्ते की तरह है जो हवा में उड़ जाता है।'
उस रात कधिर सो नहीं सका। उसे एहसास हुआ कि लोगों के दुख पर खड़ा किया गया धन कितना व्यर्थ है। अगले दिन, उसने सभी कठोर कर हटा दिए और किसानों की मदद के लिए नए कुएं खुदवाए। जब लोग खुशहाल हुए, तो राज्य की संपत्ति भी अपने आप बढ़ने लगी। कधिर अब वास्तव में एक महान राजा बन गया था।