एक सुंदर से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। अर्जुन बहुत फुर्तीला था, लेकिन उसकी एक बुरी आदत थी—वह बिना सोचे-समझे जल्दबाजी में काम करता था। उसका दोस्त रोहन बहुत शांत और समझदार था।
एक दिन, अर्जुन ने गाँव के एक पुराने आम के पेड़ पर चढ़ने का फैसला किया। रोहन ने उसे देख लिया और चेतावनी दी, "अर्जुन, ऊपर मत जाओ! वह टहनी बहुत कमजोर लग रही है।"
अर्जुन हँसते हुए बोला, "तुम डरपोक हो रोहन! मुझे सब पता है कि मैं क्या कर रहा हूँ।"
कुछ ही देर बाद, एक ज़ोरदार आवाज़ हुई और टहनी टूट गई। अर्जुन धड़ाम से नीचे गिर पड़ा। उसके पैर में गहरी चोट आई और वह दर्द से कराहने लगा। रोहन तुरंत उसके पास पहुँचा। रोहन ने उसे सिर्फ सांत्वना नहीं दी, बल्कि गंभीरता से उसकी आँखों में देखकर कहा, "अर्जुन, देखो! मैंने तुम्हें रोकने की कोशिश की थी, लेकिन तुमने मेरा मज़ाक उड़ाया। तुम्हारी इसी लापरवाही की वजह से आज तुम चोटिल हो। एक अच्छा दोस्त वही है जो तुम्हें गलत करने से रोके।"
अर्जुन को रोहन की बात सुनकर अपनी गलती का अहसास हुआ। उसे समझ आया कि रोहन उसे डाँट नहीं रहा था, बल्कि उसे सही रास्ता दिखा रहा था। उस दिन के बाद, अर्जुन ने हमेशा ऐसे दोस्त बनाए जो उसे सही और गलत के बीच फर्क बता सकें।