एक सुंदर गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। अर्जुन बहुत दयालु था, लेकिन वह बहुत जल्दी दूसरों पर भरोसा कर लेता था। उसका दोस्त रोहन हमेशा उसकी प्रशंसा करता रहता था। जब भी अर्जुन कोई छोटा काम करता, रोहन कहता, 'तुम दुनिया के सबसे अच्छे लड़के हो!' इससे अर्जुन को बहुत गर्व महसूस होने लगा।
एक बार गाँव में भीषण सूखा पड़ा। अर्जुन के पिता की एक छोटी सी दुकान थी। सूखे के कारण व्यापार कम हो गया और अर्जुन का परिवार मुश्किल दौर से गुजरने लगा। यह देखकर, जो रोहन हमेशा अर्जुन की तारीफ करता था, उसने अर्जुन से बात करना कम कर दिया। जब अर्जुन ने रोहन से मदद मांगी, तो रोहन ने बहाने बनाए और उससे दूर हो गया। अर्जुन बहुत दुखी हुआ।
अर्जुन के दादाजी ने उसकी उदासी देखी और उसे पास बुलाकर समझाया, 'अर्जुन, ऐसे विचारों को अपने मन में मत आने देना जो तुम्हें कमजोर महसूस कराएं। और सबसे जरूरी बात, उन लोगों से दोस्ती मत करना जो मुसीबत के समय तुम्हारा साथ छोड़ दें। सच्चा मित्र वही है जो तुम्हारे दुख में भी तुम्हारे साथ खड़ा रहे।' अर्जुन को अपनी गलती समझ आ गई। उसने सीखा कि दोस्ती करने से पहले इंसान को परखना जरूरी है।