एक सुंदर घाटी में अर्जुन नाम का एक लड़का अपने पिता विक्रम के साथ रहता था। एक दोपहर, जंगल में घूमते समय उन्हें एक विशाल बरगद का पेड़ मिला। उसकी छाया बहुत ठंडी और सुखद थी। 'पिताजी, यह छाया कितनी अच्छी है!' अर्जुन ने उत्साह से कहा। लेकिन विक्रम ने देखा कि पेड़ के नीचे का पानी गंदा और बदबूदार था। विक्रम ने समझाया, 'अर्जुन, छाया अच्छी हो सकती है, लेकिन अगर वह पानी बीमारी फैलाता है, तो यह छाया भी हमारे किसी काम की नहीं है।'
कुछ दिनों बाद, अर्जुन का दोस्त रोहन उसके साथ बहुत मीठा बोलता था, लेकिन पीठ पीछे वह अर्जुन की बुराई करता था। अर्जुन को जब यह पता चला, तो वह बहुत दुखी हुआ। वह रोते हुए अपने पिता के पास गया। विक्रम ने उसे समझाया, 'बेटा, जैसे एक सुंदर दिखने वाले तालाब का पानी अगर जहरीला हो तो वह नुकसान पहुँचाता है, वैसे ही अगर हमारे रिश्तेदार या मित्र हमें केवल दुख और कष्ट देते हैं, तो उनका प्रेम उस जहरीले पानी की तरह है। वह हमें केवल पीड़ा ही देगा।' अर्जुन समझ गया कि केवल मीठी बातों से नहीं, बल्कि अच्छे व्यवहार से ही सच्चे रिश्तों की पहचान होती है।