एक शांत गाँव में मलिका नाम की एक युवती रहती थी। वह न केवल बुद्धिमान थी, बल्कि उसका स्वभाव भी बहुत ही सरल और नेक था। उसकी बुद्धिमानी उसके चरित्र में झलकती थी। एक बार गाँव के एक बहुत बड़े व्यापारी ने मलिका की विद्वत्ता से प्रभावित होकर उसे एक कीमती हीरों का हार उपहार में देने का निर्णय लिया। जब गाँव वालों ने वह चमकता हुआ हार देखा, तो वे दंग रह गए। लोग कहने लगे, 'मलिका, यह हार तो तुम्हारी किस्मत बदल देगा! इसे पहनकर तुम कितनी सुखी रहोगी!'
लेकिन मलिका ने उस हार को देखकर न तो कोई लालच दिखाया और न ही कोई उत्साह। उसने बहुत ही विनम्रता से मुस्कुराते हुए कहा, 'श्रीमान, इस हीरे की चमक कुछ समय के लिए है, लेकिन दूसरों की भलाई करने से जो संतोष मिलता है, वह सदा बना रहता है। मेरे लिए इस हार से कहीं अधिक मूल्यवान वह खुशी है, जो मैं गाँव के गरीब बच्चों की पढ़ाई में मदद करके प्राप्त कर सकती हूँ।' मलिका की इस बात ने सबका दिल जीत लिया। उसने साबित कर दिया कि जिस व्यक्ति के पास सच्चा ज्ञान और ऊँचे विचार होते हैं, वह छोटी-मोटी भौतिक सुख-सुविधाओं के पीछे नहीं भागता।