एक सुंदर गाँव में आर्यन और रोहन नाम के दो दोस्त रहते थे। आर्यन बहुत ही समझदार लड़का था। वह खाना स्वाद लेकर खाता था, लेकिन जैसे ही उसका पेट भर जाता, वह रुक जाता था। वहीं रोहन का स्वभाव बिल्कुल अलग था। उसे जो भी स्वादिष्ट चीज़ मिलती, वह तब तक खाता रहता जब तक उसका पेट भारी न हो जाए।
एक दिन गाँव में एक बहुत बड़ा उत्सव था। वहाँ तरह-तरह के पकवान बने थे। आर्यन ने अपनी भूख के अनुसार थोड़ा सा खाना लिया और उसे बड़े चाव से खाया। खाना खाने के बाद वह बहुत फुर्तीला महसूस कर रहा था और बच्चों के साथ खेलने निकल गया। लेकिन रोहन ने बार-बार खाना लिया। उसने इतना ज़्यादा खा लिया कि उसे तुरंत पेट में तेज़ दर्द होने लगा।
अगले दिन आर्यन तो खुशी-खुशी खेल रहा था, लेकिन रोहन दर्द के कारण बिस्तर से उठ भी नहीं पा रहा था। आर्यन उसके पास गया और प्यार से बोला, 'दोस्त, भोजन हमें शक्ति देने के लिए है, कष्ट देने के लिए नहीं।' रोहन को अपनी गलती का एहसास हुआ। उस दिन के बाद से उसने संयम से खाना शुरू किया और फिर से स्वस्थ हो गया।