एक सुंदर गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। अर्जुन एक बहुत अमीर परिवार से था, लेकिन उसका व्यवहार लोगों को पसंद नहीं था। वह हमेशा गुस्से में रहता था, दूसरों से कड़वा बोलता था और उनकी गलतियों का मज़ाक उड़ाता था।
एक दिन गाँव के मेले में जाते समय, रवि नाम के एक लड़के ने गलती से अर्जुन से टक्कर मार दी। रवि डर गया और बोला, 'मुझे माफ़ कर दो अर्जुन!' लेकिन अर्जुन चिल्लाया, 'देखकर नहीं चल सकते? कितने मूर्ख हो तुम!' रवि दुखी होकर वहाँ से चला गया।
अर्जुन के दादाजी ने यह सब देख लिया। उन्होंने अर्जुन को पास बुलाया और समझाया, 'बेटा, तुम अमीर घर में पैदा हुए हो इसका मतलब यह नहीं कि तुम महान हो। महानता धन से नहीं, गुणों से आती है। एक महान व्यक्ति के चार गुण होते हैं: चेहरे पर मुस्कान, उदारता, मीठी वाणी और दूसरों का अपमान न करने का स्वभाव।'
अर्जुन को अपनी गलती का अहसास हुआ। अगले दिन, वह रवि के पास गया। उसने एक प्यारी सी मुस्कान के साथ कहा, 'रवि, कल के लिए मुझे माफ़ कर दो। मेरी भी गलती थी।' उसने अपनी मिठाई का डिब्बा भी रवि के साथ बाँटा। रवि के चेहरे की खुशी देखकर अर्जुन को जो सुकून मिला, वह उसे अपने धन से कभी नहीं मिला था। अब वह केवल एक अमीर लड़का नहीं, बल्कि एक महान इंसान बन गया था।