एक सुंदर से गाँव में अर्जुन और रवि नाम के दो लड़के रहते थे। अर्जुन एक बहुत अमीर परिवार से था, लेकिन वह अक्सर दूसरों से बहुत बदतमीजी से बात करता था। वहीं रवि एक गरीब मजदूर का बेटा था, लेकिन वह बहुत ही विनम्र और संस्कारी था।
एक दिन गाँव के मेले में, एक छोटा बच्चा गलती से एक बुजुर्ग व्यक्ति से टकरा गया। यह देखकर अर्जुन जोर से हँसा और बोला, 'अरे ओ लड़के! तमीज नहीं है क्या? तुम जैसे लोग यहाँ क्या कर रहे हो!' उसकी बातें बहुत कड़वी थीं। लेकिन रवि तुरंत दौड़कर गया, बुजुर्ग व्यक्ति को सहारा दिया और बड़े आदर से बोला, 'बाबा, कृपया इसे क्षमा कर दें। यह गलती से हो गया। क्या आपको चोट तो नहीं लगी?'
वहाँ मौजूद लोगों ने तुरंत अंतर देख लिया। अर्जुन के महंगे कपड़े उसकी कड़वी वाणी को नहीं छिपा सके, जिससे पता चला कि उसके संस्कार कैसे हैं। रवि के साधारण कपड़ों ने उसकी महानता को नहीं रोका; उसकी मीठी वाणी ने बता दिया कि वह एक ऊँचे चरित्र वाला व्यक्ति है। अर्जुन को उस दिन समझ आया कि इंसान अपने धन से नहीं, बल्कि अपनी वाणी से बड़ा होता है।