एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक युवक अपने बूढ़े माता-पिता के साथ रहता था। उसका परिवार बहुत गरीब था, लेकिन वे अपनी ईमानदारी और सम्मान के लिए पूरे गाँव में जाने जाते थे। एक दिन, गाँव के एक अमीर व्यापारी ने अर्जुन को एक लालच दिया। 'यह सोने की थैली और पैसे ले लो, और बस हमारी कंपनी के हिसाब-किताब में एक छोटा सा झूठ बोल दो। इससे तुम्हारी गरीबी मिट जाएगी और तुम्हारे माता-पिता ऐश की ज़िंदगी जिएंगे,' व्यापारी ने कहा।
अर्जुन सोच में पड़ गया। उस धन से वह अपने माता-पिता के लिए दवाइयाँ और अच्छे कपड़े खरीद सकता था। लेकिन उसे पता था कि अगर उसने वह झूठ बोला, तो उसके परिवार की पीढ़ियों की साख मिट्टी में मिल जाएगी। धन के लिए यदि वह अपने आदर्शों से समझौता करता, तो उसे जीवन भर शर्मिंदगी झेलनी पड़ती।
उस रात अर्जुन सो नहीं सका। उसने अपने माता-पिता के चेहरे देखे, जिन्होंने हमेशा सच्चाई की राह चुनी थी। अगली सुबह, अर्जुन व्यापारी के पास गया और बोला, 'साहब, हो सकता है कि गरीबी मेरी जान ले ले, लेकिन मैं अपने परिवार का सम्मान खोकर जीना नहीं चाहता। बेईमानी के धन से बेहतर सम्मानजनक गरीबी है।'
अर्जुन के इस साहस को देखकर गाँव वालों ने उसकी बहुत प्रशंसा की। उसकी ईमानदारी ने अंततः उसके परिवार को समाज में और भी अधिक सम्मान और एक अच्छा जीवन दिलाया।