एक सुंदर से गाँव में कवि नाम का एक लड़का रहता था। कवि का एक छोटा सा सब्ज़ी का बगीचा था। वह बहुत मेहनती था और उसके उगाए हुए सब्ज़ियाँ बहुत स्वादिष्ट होती थीं। एक बार गाँव में भीषण सूखा पड़ा। पानी की कमी होने लगी और कवि के बगीचे के पौधे भी मुरझाने लगे।
उसी समय, गाँव के एक बुजुर्ग, सैमुअल दादा, को खाने-पीने की चीज़ें जुटाने में बहुत कठिनाई हो रही थी। कवि के पिता ने कहा, 'कवि, हमारे पास जो थोड़ा बहुत पानी और खाना है, हमें वही अपने लिए बचाकर रखना चाहिए, वरना हमारे पास भी कुछ नहीं बचेगा।' लेकिन कवि ने कुछ और ही सोचा। उसने सोचा कि अगर हम न्याय और दया के साथ दूसरों की मदद करें, तो जीवन वास्तव में सार्थक होगा।
कवि ने अपने हिस्से की कुछ सब्ज़ियाँ और थोड़ा सा पानी सैमुअल दादा और अन्य ज़रूरतमंदों के साथ बाँट दिया। कवि के इस निस्वार्थ कार्य ने गाँव वालों को प्रेरित किया। सभी लोग मिलकर पानी की समस्या सुलझाने और एक-दूसरे की मदद करने के लिए आगे आए। कवि के इस नेक स्वभाव और दूसरों के काम आने की भावना को देखकर पूरा गाँव उसकी प्रशंसा करने लगा। कवि केवल एक माली नहीं रहा, बल्कि वह पूरे गाँव का प्रिय बन गया।