एक शांत गाँव में सैमुअल नाम का एक बहुत अमीर आदमी रहता था। उसके पास एक बड़ा महल, बहुत सारी ज़मीन और सोने से भरे संदूक थे। लेकिन सैमुअल बहुत अकेला था। वह न तो अपनी संपत्ति किसी को देता था और न ही उस संपत्ति का आनंद लेता था। वह बस अपना सारा समय धन इकट्ठा करने में बिता देता था।
एक दिन लियो नाम का एक छोटा लड़का उसके पास आया और बोला, 'साहब, हमारे घर में खाने की कमी है, क्या आप हमारी मदद कर सकते हैं?' सैमुअल को डर था कि कहीं उसका धन कम न हो जाए, इसलिए उसने झूठ बोल दिया, 'मेरे पास कुछ नहीं है।' लियो दुखी होकर चला गया।
कुछ दिनों बाद सैमुअल बहुत बीमार पड़ गया। उसे तेज़ बुखार था और पानी पीने के लिए भी कोई पास नहीं था। उस विशाल महल में वह बिल्कुल अकेला था। तभी लियो के पिता, जो एक गरीब मज़दूर थे, उसके दरवाज़े पर आए और बोले, 'साहब, अगर आपको कभी भी ज़रूरत हो, तो हम यहाँ हैं।'
उस पल सैमुअल को एक बड़ी बात समझ आई। उसके पास करोड़ों की दौलत थी, लेकिन वह न तो उसे दूसरों में बाँट पा रहा था और न ही उससे खुशी पा पा रहा था। उसे अहसास हुआ कि बिना दान और बिना आनंद के, वह दुनिया का सबसे गरीब आदमी है। उस दिन के बाद, सैमुअल ने अपनी संपत्ति से लोगों की मदद करना शुरू कर दिया और उसका जीवन खुशियों से भर गया।