एक छोटे से गाँव में रामू नाम का एक किसान रहता था। रामू अपनी ज़मीन का बहुत ध्यान रखता था। उसका पड़ोसी, श्याम, हमेशा कहता था, 'रामू, अगर अच्छी फसल चाहिए, तो खूब सारा खाद डालना पड़ेगा।' श्याम का मानना था कि बिना खाद के कुछ नहीं उगता।
एक साल गाँव में बहुत सूखा पड़ा। श्याम घबरा गया और उसने अपनी ज़मीन पर ढेर सारा खाद डाल दिया। लेकिन पानी की कमी के कारण वह खाद मिट्टी में मिलकर उसे पत्थर जैसा सख्त बना गया। अब उस सख्त ज़मीन में कुछ भी उगना मुश्किल था।
दूसरी ओर, रामू ने एक अलग तरीका अपनाया। उसने खाद डालने के बजाय अपनी मिट्टी की बनावट पर काम किया। उसने मिट्टी को इतनी गहराई से खोदा और उसे इतना बारीक कर दिया कि मिट्टी के कण बहुत छोटे और मुलायम हो गए। उसने मिट्टी को ऐसा तैयार किया कि उसमें हवा और नमी आसानी से जा सके।
जब कुछ दिनों बाद हल्की बारिश हुई, तो चमत्कार हो गया। श्याम का खेत सख्त होने के कारण वैसा ही रहा, लेकिन रामू के खेत में, बिना किसी अतिरिक्त खाद के, हरियाली छा गई। बारीक और तैयार मिट्टी ने नमी को सोख लिया और बीज खुशी से पनपने लगे। श्याम समझ गया कि असली ताकत खाद में नहीं, बल्कि मिट्टी की सही तैयारी में है।