एक छोटे से गाँव में आर्यन नाम का एक लड़का रहता था। आर्यन बहुत मेहनती था, लेकिन उसका परिवार बहुत गरीब था। एक गर्मी के दिन, आर्यन अपने पिता के साथ खेत में काम करने गया। सूरज बहुत तेज़ चमक रहा था और उन्होंने घंटों कड़ी धूप में मिट्टी खोदी। दोपहर तक वे दोनों बहुत थक चुके थे और प्यासे थे। उसके पिता ने अपना टिफिन खोला, जिसमें केवल पतला सा पानी जैसा दलिया था। किसी और के लिए वह बहुत मामूली भोजन हो सकता था, लेकिन आर्यन को उसे खाते ही बहुत सुकून मिला। शाम को उसके दोस्त लियो ने पूछा, 'आर्यन, क्या तुम्हें वह पतला दलिया अच्छा नहीं लगा?' आर्यन ने मुस्कुराते हुए कहा, 'बिल्कुल लगा लियो! क्योंकि हमने इसे अपनी मेहनत और पसीने से कमाया है, इसलिए वह दलिया मुझे शहद से भी ज़्यादा मीठा लगा।'
उसी गाँव में एक अमीर आदमी रहता था, जो रोज़ाना बहुत स्वादिष्ट और कीमती खाना खाता था, लेकिन क्योंकि वह कभी काम नहीं करता था और दूसरों पर निर्भर रहता था, उसे कभी भी खाने में असली संतुष्टि नहीं मिलती थी। आर्यन ने समझ लिया था कि मेहनत से मिली चीज़ का स्वाद ही अलग होता है।