एक छोटे से गाँव में करी नाम का एक लड़का अपने माता-पिता के साथ रहता था। एक साल गाँव में भीषण सूखा पड़ा, जिससे काम मिलना बंद हो गया। करी का परिवार भी बहुत गरीबी में आ गया।
भूख से व्याकुल होकर, करी ने सोचा कि अगर वह उत्सव के समय एक कटोरा लेकर खड़ा हो जाए, तो शायद कोई उसे कुछ खाने को दे दे। उसे यह सोचकर ही शर्म महसूस हो रही थी, लेकिन भूख बहुत तेज़ थी।
उत्सव के दौरान, करी एक व्यक्ति के पास गया और धीरे से बोला, "श्रीमान, क्या आप मुझे थोड़ा भोजन दे सकते हैं?" उस व्यक्ति ने करी को देखा और बिना कुछ कहे अपना दरवाज़ा बंद कर लिया।
करी वहीं खड़ा रह गया। उसे भूख से ज़्यादा उस तिरस्कार ने चोट पहुँचाई। वह घर लौटा और रोते हुए अपने पिता से कहा, "पिताजी, मैं कभी भी भीख नहीं माँगना चाहता। भूख तो बड़ी थी, लेकिन उस व्यक्ति के इनकार ने मेरा दिल तोड़ दिया।" उसके पिता ने उसे गले लगाया और कहा, "बेटा, भीख माँगना आत्मसम्मान को खत्म करता है, और उसका तिरस्कार मन को तोड़ देता है। इस दर्द को अपनी ताकत बनाओ और मेहनत करना सीखो।" उस दिन के बाद, करी ने मेहनत करने का संकल्प लिया और अपने परिवार की मदद की।