एक सुंदर से गाँव में माया नाम की एक लड़की रहती थी। माया अपने मित्र अर्जुन से बहुत प्रेम करती थी। अर्जुन एक मेहनती लड़का था जो गाँव से थोड़ा दूर रहता था। वह अक्सर दूर रहकर ही माया के परिवार की मदद करता था, लेकिन वह माया से मिलने या बात करने कम ही आता था। यह देखकर गाँव के लोग बातें बनाने लगे, 'अर्जुन बहुत मतलबी है, वह माया की परवाह नहीं करता, इसीलिए वह हमेशा उससे दूर रहता है।'
एक दिन माया की सहेली ने उससे पूछा, 'माया, सब कहते हैं कि अर्जुन तुम्हें प्यार नहीं करता और तुमसे दूर रहता है, फिर भी तुम उस पर इतना विश्वास क्यों करती हो?'
माया धीरे से मुस्कुराई और बोली, 'लोग केवल वही देखते हैं जो बाहर दिखाई देता है। उन्हें लगता है कि अर्जुन दूर है क्योंकि वह यहाँ नहीं दिखता, लेकिन मेरे दिल में वह हमेशा खुशी के साथ रहता है। उसकी हर छोटी मदद मुझे अहसास कराती है कि वह मेरा कितना ख्याल रखता है। दुनिया के लिए वह दूर हो सकता है, लेकिन मेरे मन में वह हमेशा मेरे पास है।'
माया जानती थी कि दुनिया केवल दिखावे को देखती है, जबकि सच्चा प्रेम आत्मा के भीतर बसता है।