एक सुंदर गाँव में आर्यन और मीरा नाम के पति-पत्नी रहते थे। आर्यन एक बहुत अच्छा मूर्तिकार था, लेकिन उसकी एक आदत थी—बिना सोचे-समझे जल्दबाजी में निर्णय लेना।
मीरा के पास एक बहुत ही कीमती पन्ना (emerald) का हार था, जो उसके परिवार की विरासत था। एक दिन, गाँव में एक व्यापारी आया। उसने आर्यन को बहुत मीठी बातें सुनाईं और कहा कि अगर वह उस पन्ने का उपयोग करके मूर्ति बनाएगा, तो वह बहुत प्रसिद्ध हो जाएगा। मीरा से पूछे बिना, आर्यन ने वह पन्ना व्यापारी को दे दिया।
कुछ दिनों बाद, व्यापारी गायब हो गया। न पन्ना मिला और न ही वह मूर्ति। मीरा के दुख के कारण उसकी आँखें लाल हो गईं और वह लगातार रोती रही। आर्यन को भी बहुत दुख हो रहा था, लेकिन वह दुख अपने किए पर पछतावा था या नुकसान का, यह स्पष्ट नहीं था।
गाँव के एक बुद्धिमान बुजुर्ग ने कहा, 'आर्यन, तुम्हारी आँखों ने व्यापारी की बातों की चमक तो देख ली, लेकिन सच्चाई को नहीं देख पाईं। अब जब तुम दुखी हो, तो क्या तुमने अपनी उस गलती को समझा है जो तुमने बिना सोचे-समझे की थी?'
आर्यन को अपनी भूल का एहसास हुआ। उसने सीखा कि केवल देखना ही काफी नहीं है, बल्कि विवेक के साथ देखना जरूरी है।