एक शांत गाँव में माया और अर्जुन नाम का एक जोड़ा रहता था। अर्जुन बहुत ही मीठा बोलने वाला व्यक्ति था। वह अक्सर माया से कहता, 'तुम मेरी दुनिया हो' और 'तुम्हारे बिना मैं अधूरा हूँ।' सुनने वालों को लगता कि वे बहुत सुखी हैं, लेकिन माया के मन में एक खालीपन था।
माया ने गौर किया कि जब भी अर्जुन प्यार भरी बातें करता, उसकी नज़रें कहीं और होती थीं। वह माया की आँखों में नहीं, बल्कि कमरे की चीज़ों या बाहर के नज़ारों में खोया रहता था। एक दिन माया बहुत बीमार हो गई। अर्जुन उसके पास बैठा और बहुत ही सुंदर शब्दों में अपनी चिंता ज़ाहिर की। उसने बहुत बड़ी-बड़ी बातें कहीं, लेकिन उसने माया का हाथ नहीं थामा और न ही उसकी आँखों में देखकर उसे ढांढस बंधाया। उसके शब्द तो मीठे थे, पर उसके दिल में वह गहराई नहीं थी जो एक साथी को चाहिए होती है। माया को महसूस हुआ कि अर्जुन उसके पास होकर भी बहुत दूर है। उसके शब्द तो प्यार से भरे थे, लेकिन उसकी आँखें उस सच्चे प्यार को ढूँढ रही थीं जो केवल शब्दों में नहीं, बल्कि दिल में होता है।