एक शांत घाटी में इला और उसका पति जूलियन रहते थे। जूलियन एक नेक इंसान था, लेकिन काम की वजह से उसे अक्सर लंबे समय के लिए बाहर जाना पड़ता था। एक बार जब जूलियन काफी समय तक बाहर रहा, तो इला बहुत उदास रहने लगी। उसकी आँखों की चमक खो गई और वह बहुत कमजोर और पीली दिखने लगी। गाँव वाले उसे देखकर कहते, 'बेचारी इला, कितनी मुरझा गई है।'
इला की सहेलियाँ उससे मिलने आती थीं। वे उसकी हालत देखकर दुखी होती थीं। एक शाम उसकी बहन माया ने पूछा, 'इला, तुम इतनी क्यों टूट रही हो? अगर जूलियन तुम्हारा ख्याल नहीं रख रहा है, तो क्या तुम्हें बुरा नहीं लगता कि लोग उसके बारे में ऐसी बातें कर रहे हैं?'
इला धीरे से मुस्कुराई और बोली, 'माया, अगर मेरी इस हालत को देखकर मेरे अपने लोग जूलियन को यह न कहें कि उसने मुझे इतना कष्ट क्यों दिया, तो समझो मेरा प्रेम सच्चा नहीं है। अगर वे मेरे मुरझाए हुए चेहरे को देखकर जूलियन की कमी को महसूस करें और उसे टोकें, तो यही मेरे प्रेम की सबसे बड़ी जीत होगी। उनकी वह नाराजगी ही मेरे प्रेम की गवाह बनेगी।'
जब जूलियन वापस आया, तो उसने देखा कि इला की शारीरिक कमजोरी उसके प्रेम की गहराई का प्रमाण थी। लोगों की बातें सुनकर उसे एहसास हुआ कि इला का प्रेम कितना अटूट था।