एक छोटे से गाँव में राहुल और प्रिया रहते थे। राहुल बहुत मेहनती था, लेकिन उसकी बातचीत अक्सर बहुत रूखी और सीधी होती थी। प्रिया बहुत कोमल हृदय की थी और वह प्यार से बात करने में विश्वास रखती थी।
एक दिन प्रिया ने बड़े प्यार से घर के लिए एक सुंदर फूलों का गुलदस्ता सजाया। उसने राहुल को दिखाते हुए पूछा, 'राहुल, देखो यह कैसा लग रहा है?' राहुल ने बिना ज्यादा सोचे कहा, 'फूलों का रंग थोड़ा फीका है।' इतना कहकर वह अपने काम में लग गया। प्रिया का मन उदास हो गया। उसे फूलों की आलोचना नहीं, बल्कि राहुल के प्यार भरे शब्दों की ज़रूरत थी।
शाम को जब घर में सन्नाटा छाया था, राहुल को अपनी गलती का एहसास हुआ। वह प्रिया के पास गया और धीरे से बोला, 'प्रिया, मुझे माफ़ कर दो। मैंने आज सही से नहीं कहा, पर यह गुलदस्ता वाकई बहुत सुंदर है और इससे घर में रौनक आ गई है।' प्रिया के चेहरे पर तुरंत मुस्कान आ गई। राहुल समझ गया कि अपनों से प्यार भरे शब्द न मिलना जीवन को कितना सूना बना देता है।