एक शांत गाँव में इला नाम की एक स्त्री रहती थी। वह अपने पति माधव से बहुत प्रेम करती थी। माधव स्वभाव से बहुत गंभीर और शांत व्यक्ति था। वह इला के प्रति अपना प्रेम जताने के लिए अक्सर शब्द या विशेष व्यवहार नहीं करता था, जिससे इला कभी-कभी अकेलापन महसूस करती थी।
एक शाम इला की तबीयत बहुत खराब थी और वह उदास थी। वह खिड़की के पास बैठी गहरी सांसें ले रही थी। माधव कमरे में आया। उसने न तो इला को गले लगाया और न ही उसके लिए कुछ खास किया। उसने बस बहुत ही शांत और कोमल स्वर में कहा, "परेशान मत हो इला, सब ठीक हो जाएगा। तुम बस आराम करो।"
भले ही माधव ने अपने कार्यों से अपना प्रेम प्रकट नहीं किया था, लेकिन उसके वे शब्द इला के कानों में शहद की तरह मीठे लगे। उन शब्दों की सौम्यता ने उसके मन को शांति दी। इला ने महसूस किया कि भले ही उसका प्रियतम प्रेम न जताए, फिर भी उसके शब्दों की मिठास हृदय को सुकून देने के लिए काफी है।