एक छोटे से गाँव में मालती नाम की एक महिला रहती थी। उसका पति, अजय, काम के सिलसिले में बहुत दूर चला गया था। जब से अजय गया था, मालती का मन बस उसकी यादों में डूबा रहता था। हर रात, वह अपनी खिड़की के पास बैठकर आसमान की ओर देखती थी।
एक रात, चाँद बहुत ही सुंदर और चमकदार दिख रहा था। मालती ने चाँद की ओर देखते हुए धीरे से कहा, 'हे चाँद! तुम कभी मत छिपना। मेरे प्रिय अजय मुझसे दूर चले गए हैं, और जब तक वे वापस नहीं आते, तुम इसी तरह चमकते रहना। अगर तुम चले गए, तो मैं इस अंधेरे में उनके बिना कैसे रहूँगी? तुम्हारी रोशनी में ही मुझे उनकी याद आती है।'
मालती की आँखों में आँसू थे, लेकिन चाँद की उस शीतल रोशनी ने उसके दिल को एक अजीब सा सुकून दिया। उसे लगा जैसे चाँद की रोशनी में अजय का चेहरा झलक रहा हो। उस रोशनी ने उसे विश्वास दिलाया कि उसका इंतज़ार बेकार नहीं जाएगा।