पहाड़ों के पास बसे एक छोटे से गाँव में आर्यन और मीरा रहते थे। आर्यन एक मेहनती लकड़हारा था। एक सुबह जब वह काम पर निकला, तो मीरा की यादों ने उसके चेहरे पर मुस्कान ला दी। उसने सोचा, 'शाम को जब हम मिलेंगे, तो कितना अच्छा लगेगा!'
लेकिन उस दिन काम का बोझ बहुत ज़्यादा था। दोपहर की भागदौड़ में वह मीरा को एक छोटा सा संदेश भेजना भी भूल गया। जैसे ही सूरज ढलने लगा और आसमान में लालिमा छा गई, आर्यन घर की ओर चल पड़ा। लेकिन इस शाम ने उसे खुशी नहीं दी। शाम की शांति उसे उस कमी का अहसास करा रही थी जो उसने दिन भर महसूस की थी।
जब वह घर पहुँचा, तो मीरा उदास थी। दिन भर की खामोशी ने शाम को एक दुश्मन की तरह बना दिया था, जो उनके बीच के खालीपन को और गहरा कर रही थी। आर्यन को समझ आया कि दिन के उजाले में जो प्यार वह साझा करना भूल गया था, वही शाम के अंधेरे में दुख बनकर लौट आया है। उन्होंने वादा किया कि वे अब से एक-दूसरे का ख्याल रखने में कभी कमी नहीं छोड़ेंगे।