एक सुंदर पहाड़ी गाँव में माया नाम की एक लड़की रहती थी। वह अपने पति अर्जुन से बहुत प्यार करती थी। लेकिन एक छोटी सी अनबन के बाद, अर्जुन ने उसे नज़रअंदाज़ करना शुरू कर दिया। माया सारा दिन उदास रहती और यह सोचकर रोती रहती कि वह ऐसा क्यों कर रहा है। उसका मन भारी रहता था।
उसकी दादी, सरिता, ने माया की उदासी देखी। एक शाम उन्होंने माया को समझाया, 'बेटी, जो व्यक्ति तुम्हें दुख दे रहा है, उसके बारे में सोचकर तुम अपने मन को क्यों सता रही हो? जिसने तुम्हें यह दुख दिया, वह तुम्हारे बारे में सोच भी नहीं रहा, तो तुम क्यों अपनी खुशियाँ उसके नाम कर रही हो?'
दादी की बात माया के दिल को छू गई। उसे समझ आया कि वह उस इंसान के लिए अपना समय और भावनाएं बर्बाद कर रही है जिसे उसकी परवाह नहीं है। उसने रोना बंद किया और अपने काम और दूसरों की मदद करने में मन लगाया। धीरे-धीरे उसका दुख कम होने लगा और उसे अपनी शक्ति का एहसास हुआ।