एक छोटे से गाँव में आर्यन और मीरा रहते थे। आर्यन को शांति पसंद थी और मीरा को संगीत। एक दिन मीरा को अपने मायके जाना पड़ा। जब वह जल्दी-जल्दी अपना सामान बाँध रही थी, तो उसकी कलाई में पहनी हुई चूड़ियाँ काफी तंग थीं। जाते समय जब वह मुड़ी, तो उन चूड़ियों ने उसकी कलाई पर एक हल्का सा निशान छोड़ दिया, जिससे पता चला कि वे कितनी कसकर पहनी गई थीं।
मीरा के जाने के बाद, आर्यन का मन उदास हो गया। घर में सन्नाटा पसर गया और उसे मीरा की बहुत याद आने लगी। लेकिन जब उसने उन चूड़ियों के बारे में सोचा, तो उसे एक सुकून मिला। उसे लगा कि जिस तरह चूड़ियाँ उसकी कलाई से लिपटी हुई थीं, उसी तरह मीरा का मन भी जल्द ही उसके पास लौट आएगा। उस चूड़ी के निशान ने उसे यह अहसास दिलाया कि यह जुदाई स्थायी नहीं है। मीरा के वापस आने की उम्मीद ही उसके दुख की सबसे बड़ी दवा बन गई।