एक सुंदर से गाँव में मीरा और आर्यन रहते थे। वे एक-दूसरे से बहुत प्रेम करते थे। आर्यन एक चित्रकार था और मीरा की मुस्कान ही उसकी कला की प्रेरणा थी। एक दिन, आर्यन को एक प्रदर्शनी के लिए शहर जाना पड़ा। 'मैं जल्दी लौट आऊंगा,' कहकर आर्यन चला गया।
दुनिया के लिए तो बस कुछ ही दिन बीते थे, लेकिन मीरा के लिए समय जैसे ठहर गया था। उसे न भूख लगती थी, न नींद आती थी। उसका चेहरा जो हमेशा चमकता रहता था, अब पीला और मुरझाया हुआ दिखने लगा था। उसकी सहेली नेहा ने पूछा, 'मीरा, तुम इतनी उदास क्यों हो? आर्यन को गए तो अभी कुछ ही दिन हुए हैं।'
मीरा की आँखों में आँसू आ गए। उसने धीरे से कहा, 'नेहा, ऐसा लगता है जैसे वह कल ही गया हो। लेकिन उसके बिना बीते इन सात दिनों में मेरा चेहरा पूरी तरह फीका पड़ गया है।' प्रेम की गहराई केवल शब्दों में नहीं होती, बल्कि प्रिय के दूर जाने पर शरीर और मन में आने वाले बदलावों में झलकती है।