एक छोटे से गाँव में मीरा और समीर रहते थे। उन दोनों का प्यार बहुत गहरा था। एक बार समीर को काम के सिलसिले में कुछ दिनों के लिए शहर जाना पड़ा। जब समीर जाने लगा, तो मीरा बहुत शांत थी। उसने न तो रोया और न ही अपनी उदासी को शब्दों में बताया।
समीर के जाने के बाद, मीरा अपने रोज़ के काम तो करती थी, लेकिन उसका मन कहीं और ही रहता था। जब उसकी सहेलियाँ उससे मिलने आतीं, तो वह मुस्कुराती तो थी, लेकिन उसकी आँखों में एक खालीपन और इंतज़ार सा दिखता था। उसकी आँखें समीर की याद में तड़प रही थीं। जो भी उसकी आँखों में देखता, वह समझ जाता कि मीरा के दिल में कितना प्यार और विरह है।
जब समीर वापस आया, तो मीरा को कुछ कहने की ज़रूरत नहीं पड़ी। उनकी आँखों ने ही सब कुछ कह दिया था। समीर समझ गया कि मीरा का प्यार कितना सच्चा है। उन्होंने महसूस किया कि जो बातें शब्द नहीं कह पाते, वे आँखें बड़ी खूबसूरती से कह देती हैं।