एक शांत गाँव में कवि और माया नाम का एक जोड़ा रहता था। कवि एक कुशल शिल्पकार था और माया एक सुंदर चित्रकार। एक बार कवि को काम के सिलसिले में दूर शहर जाना पड़ा। विदा लेते समय माया बहुत उदास थी। कवि ने उसका हाथ थामकर कहा, "माया, भले ही मैं दूर रहूँ, पर मेरे विचार हमेशा तुम्हारे साथ रहेंगे। जब तुम मुझे याद करोगी, तो तुम्हारा मन खुश होगा, और जब मैं तुम्हें देखूँगा, तो मेरी आँखें तृप्त हो जाएँगी।"
कवि के जाने के बाद, माया ने अपनी कला में डूबकर सुंदर चित्र बनाए। उसने उन चित्रों में कवि की मुस्कुराहट और उनके बिताए हुए पलों को उकेरा। कवि भी हर हफ्ते माया को पत्र भेजता था। उन पत्रों में वह केवल काम की बातें नहीं करता था, बल्कि माया के प्रति अपने प्रेम और उनकी मीठी यादों का वर्णन करता था। उन पत्रों को पढ़कर माया को ऐसा लगता जैसे कवि उसके पास ही है।
जब कवि वापस आया, तो एक-दूसरे को देखते ही दोनों के चेहरों पर मुस्कान आ गई। उन्हें समझ आया कि प्रेम केवल साथ रहने का नाम नहीं है, बल्कि एक-दूसरे को याद करके मन को प्रसन्न करना और एक-दूसरे को देखकर आत्मा को सुकून मिलना ही सच्चा प्रेम है।