एक छोटे से सुंदर गाँव में मीरा और आर्यन रहते थे। आर्यन एक बढ़िया चित्रकार था। एक बार आर्यन को काम के सिलसिले में कुछ दिनों के लिए शहर जाना पड़ा। जाने से पहले मीरा ने थोड़ा गुस्सा दिखाने का नाटक किया। उसने मुँह फेरते हुए कहा, 'मुझे आपका बार-बार जाना बिल्कुल पसंद नहीं है!'
आर्यन ने मीरा की आँखों में देखा। उसे समझ आ गया कि मीरा का गुस्सा सिर्फ एक दिखावा है। जैसे कोई जानता हो कि नदी की लहरें उसे बहा ले जाएँगी, फिर भी कोई उसमें कूद पड़ता है, वैसे ही मीरा अपने प्यार को छिपाने की कोशिश कर रही थी, जबकि उसका दिल आर्यन के बिना अधूरा महसूस कर रहा था।
आर्यन ने धीरे से मीरा का हाथ पकड़ा और कहा, 'मीरा, तुम चाहे जितना भी गुस्सा होने का नाटक कर लो, पर तुम्हारी आँखों की चमक बता रही है कि तुम मुझसे कितना प्यार करती हो।' आर्यन की बात सुनकर मीरा का सारा गुस्सा गायब हो गया और वह रोते हुए उसके गले लग गई। उसे समझ आ गया कि सच्चे प्यार को झूठ से दबाया नहीं जा सकता।