एक शांत गाँव में इलवंती और मारन नाम का एक जोड़ा रहता था। मारन बहुत मेहनती था, लेकिन काम की भागदौड़ में वह अक्सर इलवंती की भावनाओं को समझ नहीं पाता था। एक शाम, इलवंती बहुत उदास होकर अपने घर के बरामदे में बैठी थी।
उस दिन उसने देखा था कि मारन ने अपने मित्र कतिर की मदद कैसे की थी। जब कतिर मुश्किल में था, तब मारन ने अपना समय और संसाधन उसकी सहायता के लिए निकाल दिए थे। दूसरों के बीच उस अटूट प्रेम और समर्पण को देखकर इलवंती के मन में एक सवाल उठा। उसने अपने मन से कहा, 'तूने देखा है कि कैसे एक व्यक्ति दूसरे के प्रति समर्पित रहता है। यदि मारन अपने मित्र के लिए इतना कुछ कर सकता है, तो मेरा अपना मन मेरा साथ क्यों नहीं दे रहा? मेरा मन मुझे सांत्वना देने के बजाय मुझे अकेला क्यों छोड़ देता है?'
अगली सुबह, इलवंती ने मारन को अपनी उदासी के बारे में बताया। जब उसने अपने मन के संघर्ष को साझा किया, तो मारन को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने इलवंती को गले लगाया और वादा किया कि वह हमेशा उसकी भावनाओं का सम्मान करेगा और उसका साथ देगा। उस दिन के बाद से, उनका रिश्ता और भी गहरा हो गया।