एक सुंदर से गाँव में कन्नन और नीला नाम का एक जोड़ा रहता था। नीला बहुत ही सरल और प्रेममयी स्वभाव की थी, लेकिन कभी-कभी वह छोटी-छोटी बातों पर रूठ जाती थी। एक दिन, कन्नन नीला के लिए उसके पसंदीदा फूल लाना भूल गया। नीला को बुरा लगा और उसने मुँह फेरकर कहा, 'अब मुझसे बात मत करना!'
असल में, नीला नाराज़ नहीं थी; वह तो बस चाहती थी कि कन्नन उसकी उदासी को समझे और आकर उसे प्यार से गले लगा ले। लेकिन कन्नन ने सोचा, 'वह गुस्से में है, अभी पास जाना ठीक नहीं होगा।' वह दूर चला गया। इससे नीला को और भी दुख हुआ। वह पहले से ही उदास थी, और कन्नन की इस बेरुखी ने उसके दिल को और भी चोट पहुँचाई।
थोड़ी देर बाद, जब कन्नन ने नीला की आँखों में आँसू देखे, तो उसे समझ आया कि नीला गुस्सा नहीं थी, बल्कि वह तो बस प्यार की चाहत में थी। वह तुरंत उसके पास गया और उसे बड़े प्यार से गले लगा लिया। नीला के चेहरे पर मुस्कान आ गई। कन्नन ने सीखा कि जब कोई दुखी होकर रूठता है, तो उसे अकेला छोड़ना नहीं, बल्कि प्यार से मनाना चाहिए।