अंबु और नीला एक सुंदर से गाँव में रहते थे। एक शाम, अंबु की एक छोटी सी भूल की वजह से नीला उससे नाराज हो गई। उसने बात न करने का फैसला किया। यह नाराजगी केवल दिखावे की थी; असल में वह तो बस अंबु का प्यार और ध्यान चाहती थी।
जब वे दोनों एक ही कमरे में बैठे थे, तो उनके बीच एक भारी सन्नाटा छा गया। नीला के मन में एक बेचैनी थी। वह बार-बार सोच रही थी, 'क्या अंबु मुझे मनाने आएगा? या यह खामोशी यूँ ही चलती रहेगी?' इस बात का डर और संदेह कि उनका मेल कब होगा, उसे बहुत दुखी कर रहा था। यह अनिश्चितता ही उसके लिए सबसे बड़ा दुख बन गई थी।
अंबु ने नीला की चुप्पी को महसूस किया। वह उसे मनाने के लिए एक छोटा सा फूल लेकर आया और धीरे से उसके पास बैठ गया। अंबु की आंखों में पछतावा देखकर नीला का गुस्सा पिघल गया। वह मुस्कुराई और दोनों फिर से बातें करने लगे। उस छोटी सी तकरार ने उनके रिश्ते को और भी मजबूत बना दिया।