एक विशाल जंगल में विक्रम नाम का एक शक्तिशाली शेर रहता था। विक्रम बहुत ताकतवर था, लेकिन वह बहुत घमंडी भी था। जब उसे भूख नहीं होती थी, तब भी वह मनोरंजन के लिए दूसरे जानवरों का शिकार करता था। इससे जंगल के सभी जानवर डरे हुए रहते थे।
एक दिन, सभी जानवरों ने मिलकर एक सभा की। उन्होंने शेर के पास जाकर एक प्रस्ताव रखा: "महाराज, आप रोज़ शिकार करते हैं जिससे जंगल के जानवर कम हो रहे हैं। हम वादा करते हैं कि हम रोज़ एक जानवर खुद आपके पास भेज देंगे। इससे आपको शिकार के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और बाकी जानवर शांति से रह सकेंगे।" विक्रम मान गया।
एक दिन नन्हे खरगोश की बारी आई। खरगोश बहुत बुद्धिमान था। वह मरना नहीं चाहता था, इसलिए उसने एक योजना बनाई। वह जानबूझकर शेर के पास देरी से पहुँचा।
भूखा और गुस्से में भरा विक्रम दहाड़ा, "तुम इतनी देर से क्यों आए?"
खरगोश ने डरने का नाटक करते हुए कहा, "महाराज, क्षमा करें! रास्ते में मुझे एक दूसरा शेर मिला। वह कह रहा था कि वही इस जंगल का असली राजा है। उसने मेरे साथियों को भी खा लिया!"
विक्रम गुस्से से लाल हो गया। "कहाँ है वह दूसरा शेर? मुझे अभी दिखाओ!"
खरगोश उसे एक गहरे गड्ढे के पास ले गया जहाँ बारिश का पानी जमा था। खरगोश ने कहा, "वह इस गड्ढे के अंदर छिपा है!"
जैसे ही विक्रम ने गड्ढे में झाँका, उसे पानी में अपनी ही परछाईं दिखाई दी। उसने सोचा कि वह दूसरा शेर है। गुस्से में आकर उसने गड्ढे में छलांग लगा दी। गड्ढा गहरा और फिसलन भरा था, जिससे शेर बाहर नहीं निकल सका। खरगोश सुरक्षित भाग गया और जंगल के सभी जानवर खुश हो गए।
Moral
बुद्धि बल से बड़ी होती है।