पुराने समय में एक समृद्ध राज्य में एक युवा राजा शासन करता था। उसे लगता था कि बुजुर्गों की राज्य में कोई ज़रूरत नहीं है, इसलिए उसने एक कठोर कानून बनाया कि सभी वृद्धों को राज्य छोड़ना होगा। कई परिवार अपने प्रियजनों से बिछड़कर दुखी थे।
उसी राज्य में एक बहादुर सैनिक रहता था। वह अपने बूढ़े पिता को छोड़ना नहीं चाहता था, इसलिए उसने उन्हें अपने घर में एक गुप्त स्थान पर छिपाकर रखा था। समय बीतता गया और राज्य में भयंकर सूखा पड़ा। अनाज के सारे भंडार खत्म हो गए। बारिश होने के बावजूद, खेतों में कोई फसल नहीं उग रही थी।
राजा और उसके मंत्रियों को समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें, क्योंकि सलाह देने के लिए कोई बुद्धिमान बुजुर्ग नहीं बचा था। तब सैनिक अपने पिता के पास गया और उन्हें सारी बात बताई। वृद्ध पिता ने शांति से कहा, "अन्न भंडार के रास्तों पर जाकर मिट्टी को ध्यान से देखो।"
सैनिक ने वैसा ही किया। उसने देखा कि अनाज के गोदामों के पास वाले रास्तों पर बारिश के पानी से छोटे-छोटे पौधे निकल रहे हैं। उसने उन पौधों को इकट्ठा किया और खेतों में बो दिया। यह देखकर राजा हैरान रह गया और उसने पूछा, "तुम्हें यह कैसे पता चला?"
सैनिक अपने पिता को सबके सामने ले आया। वृद्ध व्यक्ति ने कहा, "महाराज, सालों से अनाज ले जाने वाली गाड़ियों से गिरे हुए छोटे-छोटे बीज मिट्टी के नीचे जीवित हैं। जैसे ही उन्हें पानी और धूप मिलती है, वे फिर से जीवित हो उठते हैं। अनुभव भी इन बीजों की तरह होता है, जो सही समय का इंतज़ार करते हैं।"
राजा को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने सभी बुजुर्गों को वापस बुलाने का आदेश दिया और राज्य फिर से खुशहाल हो गया।
Moral
बुजुर्गों का अनुभव समाज की असली ताकत है।