एक घने जंगल के किनारे कवि नाम का एक लोमड़ी रहता था। उस साल जंगल में सूखा पड़ा था, जिससे कवि के लिए भोजन ढूँढना बहुत मुश्किल हो गया था। भूख के कारण वह बहुत कमज़ोर हो गया था।
एक दिन भोजन की तलाश में कवि पास के एक गाँव में पहुँचा। वहाँ उसने देखा कि एक घर के बरामदे में ब्रूनो नाम का कुत्ता बहुत ही स्वस्थ और तंदुरुस्त बैठा है। उसकी चमक देखकर कवि हैरान रह गया।
कवि उसके पास गया और धीरे से पूछा, "दोस्त, तुम कितने तंदुरुस्त दिख रहे हो! क्या तुम रोज़ जंगल में शिकार करके इतना खाना जुटाते हो?"
ब्रूनो हँसते हुए बोला, "नहीं दोस्त, मुझे शिकार करने की ज़रूरत नहीं पड़ती। इस घर का मालिक रोज़ मुझे स्वादिष्ट मांस और दूध देता है। मुझे बस घर की रखवाली करनी होती है।"
कवि बहुत खुश हुआ। उसने कहा, "तो तुम भी मेरे साथ जंगल चलो, हम साथ मिलकर खाना ढूँढेंगे!"
तभी कवि की नज़र ब्रूनो की गर्दन पर पड़े एक निशान पर पड़ी। वह निशान किसी चोट जैसा लग रहा था। कवि ने चिंता से पूछा, "तुम्हारी गर्दन पर यह निशान कैसे आया?"
ब्रूनो का चेहरा उतर गया। उसने कहा, "एक बार मैंने घर से बाहर भागने की कोशिश की थी। तब मालिक ने मुझे डंडे से मारा था। अब ताकि मैं कहीं भाग न सकूँ, वे रोज़ रात को मेरे गले में एक भारी लोहे की ज़ंजीर बाँध देते हैं।"
यह सुनकर कवि दंग रह गया। उसे समझ आया कि ब्रूनो के पास पेट भरने के लिए अच्छा खाना तो है, लेकिन उसके पास अपनी मर्ज़ी से कहीं भी जाने की आज़ादी नहीं है। कवि ने कहा, "तुम्हारे पास खाना तो बहुत है, लेकिन तुम एक कैदी हो। मुझे भूख लग सकती है, लेकिन मैं अपनी आज़ादी खोना नहीं चाहता।"\n कवि तुरंत वहाँ से मुड़ा और जंगल की ओर दौड़ गया। उसे भूख तो लग रही थी, लेकिन जंगल की ताज़ी हवा में आज़ादी से दौड़ने का सुख अनमोल था।
Moral
आज़ादी से बढ़कर दुनिया में कोई सुख नहीं है।