एक सुंदर से गाँव में मनी नाम का एक छोटा कुत्ता रहता था। मनी बहुत ही समझदार और ज़िम्मेदार था। उसका मालिक एक किसान था। हर सुबह, मनी अपनी पीठ पर एक छोटी टोकरी में ताज़ा खाना और फल रखकर खेत तक ले जाता था। मनी इतना सावधानी से चलता था कि खाने का एक दाना भी ज़मीन पर नहीं गिरता था। उसके मालिक को मनी की इस आदत पर बहुत गर्व था।
लेकिन पड़ोस के कुत्ते मनी की इस लोकप्रियता से जलते थे। वे अक्सर रास्ते में मनी को रोककर कहते, "इतनी मेहनत क्यों करते हो? खाना खुद ही खा लो और आराम करो!" मनी उनकी बातों पर ध्यान नहीं देता था। लेकिन धीरे-धीरे, वे कुत्ते मनी का मज़ाक उड़ाने लगे और उसे 'नौकर कुत्ता' कहकर चिढ़ाने लगे।
एक दिन, उन कुत्तों की बातों से मनी का मन बहुत दुखी हो गया। उसे लगा कि शायद वे सही कह रहे हैं। कमज़ोरी के एक पल में, मनी ने मालिक के खाने में से थोड़ा हिस्सा खुद खा लिया। यह देखकर पड़ोस के कुत्ते ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगे। "देखो! यह तो दिखावा कर रहा था, असल में यह भी हमारे जैसा ही है!" वे चिल्लाए।
मनी को बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई। उसे समझ आया कि दूसरों के मज़ाक से बचने के चक्कर में उसने अपनी सच्चाई खो दी है। अगले दिन, उसके मालिक ने मनी की उदासी देख ली। उसने मनी को प्यार से समझाया, "मनी, दूसरे क्या कहते हैं इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। तुम जो हो, वही रहो। दूसरों की बातों में आकर अपनी अच्छाई मत छोड़ना।"
मालिक की बात सुनकर मनी को बहुत हिम्मत मिली। उसने तय किया कि वह अब कभी दूसरों की बातों में आकर अपना रास्ता नहीं बदलेगा और ईमानदारी से अपना काम करता रहेगा।
Moral
दूसरों की बातों या मज़ाक के कारण अपनी अच्छी आदतों को कभी न बदलें।